Hindu Dharma Quotes in Hindi, Marathi, Sanskrit
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भगवद गीता से लिए गए प्रमुख अनमोल वचन (Bhagavad Gita) तुम्हारा अधिकार केवल अपने कर्तव्यों में है, न कि उनके फल में। तुम्हारे कर्मों का फल तुम्हारा अधिकार नहीं है, और कर्म न करने में तुम्हारा कोई स्वार्थ नहीं है।” – भगवद गीता 2.47 जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का प्रकोप बढ़ता है, तब-तब मैं स्वयं को उत्पन्न करता हूँ। साधु पुरुषों के उद्धार के लिए, दुष्कर्मियों के विनाश के लिए और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता हूं। – भगवद गीता 4.7 सभी धर्मों को छोड़कर, केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, घबराओ मत। – भगवद गीता 18.66 जो सच्चे भाव से पूजा करता है, वह भगवान को प्राप्त करता है। – भगवद गीता 9.22 जो व्यक्ति शरीर, वाणी और मन से कोई भी कर्म करता है, लेकिन फल के लिए लोभ नहीं करता और कर्मों को भगवान को अर्पित करता है, वही सच्चा योगी है। – भगवद गीता 5.8.9 आत्मा कभी जन्म नहीं लेती और कभी मरती नहीं, यह न तो उत्पन्न होती है, न ही इसका अंत होता है। – भगवद गीता 2.20
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imravi
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